कम बोलने का फायदा क्या होता है? कम क्यों बोलना चाहिए

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कम बोलने जितना फायदेमंद होता है, उतना फायदेमंद कोई और आदत नहीं हो सकता है। जितना कम बोला जाए उतना फायदे मंद होता है। कम बोलने वाली की बात दूसरे बहुत ध्यान के साथ सुनते है। हर एक सफल व्यक्ति की आदत होती है कम बोलना। दूसरे शब्दों में कम बोलना सफल व्यक्ति की आदतों में से एक आदत होता है। चलिए हम कम बोलने के फायदे को जानते है.

बोलना एक माध्यम होता है जिसकी मदद से कोई अपनी विचार को दूसरे किसी के सामने रखता है। दूसरे उसको सुनकर समझ पाते है। हर एक इंसान को अपनी बात बोलने की पूरी आजादी होती है। इसके बाद भी कुछ लोग ज्यादा बोलते है तो कुछ लोग कम बोलते है। हम अकसर सुनते है की हमें कम से कम बोलना चाहिए। कम बोलने का बहुत फायदा होता है लेकिन कोई भी कम बोलने के फायदे के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताता है।

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कम बोलने का मतलब क्या होता है

कम बोलने का मतलब होता है उतना ही बोलना जितना जरुरी हो। कभी भी अपनी बात को उतना ही बोलना चाहिए जितना जरूरी या बहुत जरूरी हो। जैसे अगर कोई कहे, आप अपने बारे में बताये? इस सवाल का जवाब ज्यादा लम्बा भी हो सकता है और सामान्य भी हो सकता है। जो ज्यादा बोलने वाला व्यक्ति होगा, वह अपने बारे में सामने वाले को इतना कुछ बताने लगेगा जिसको सुनना सामने वाले को पसंद न हो। वही कम बोलने वाला व्यक्ति बस अपने बारे में उतना ही बताएगा, जितना सामने वाला सुनना चाहता है। बस उतना ही बोलना जितने में पूरी जानकारी दी जा सकते उसे ही कम बोलना कहते है।

कम बोलना क्यों जरूरी होता है

एक सवाल ऐसा भी है जो सभी के मन में आता रहता है कि आखिर कम क्यों बोलना चाहिए। कम बोलना क्यों जरूरी है। ऐसा सवाल उनके दिमाग में ज्यादा आता है जो ज्यादा बोलते है। कम बोलने वाले को कई फायदे मिलते है जैसे, उसकी बात को दूसरे ध्यान के साथ सुनते है, कम बोलकर अपनी बहुत सी शक्ति को बचाया जा सकता है, कम बोलने से समय बचता है, कम बोलने के कारण ज्यादा से ज्यादा दूसरों की बाते सुन सकते है और अपनी जानकारी को बढ़ा सकते है।

यह सभी फायदे कम बोलने के फायदे है, कम बोलने का फायदा (kam bolane ka fayda) इससे ज्यादा भी होता है। इसलिए ही कम बोलना जरूरी होता है।

कम बोलने के फायदे

आखिरकार कम बोलने का क्या फायदा होता है। कम बोलन कर हम कितने तरह के फायदे ले सकते है। किसी काम को करने से पहले उसके फायदे को जानना जरूरी होता है। चलिए यह सब कुछ हम एक-एक कर के जानते है।

कम बोलने से समाज में इज्जत का बढ़ता है

जो भी व्यक्ति कम बोलता है, उसको दूसरे बहुत ज्यादा पसंद करते है। इस समय हमें आसानी के साथ ज्यादा बोलने वाला व्यक्ति तो मिल सकता है लेकिन कम बोलने वाला व्यक्ति बहुत मुश्किल से ही मिलता है। जो भी कम बोलता है इसका मतलब है कि वह बस उतना ही बोलता है जितना जरुरी हो। इस तरह से वह किसी दूसरे की अपनी बातो से ऊबाता भी नहीं है। कम बोलने वाला दूसरों की बात को भी सुनता है जिसके कारण दूसरे और ज्यादा कम बोलने वाले को पसंद करते है।

ज्यादा सोचने और सुनने का मौका मिलता है

कम बोलने का यह भी फायदा होता है कि ज्यादा से ज्यादा समय मिलता है सोचने का और दूसरे की बात को सुनने का। जो जितना ज्यादा सोच समझ कर कुछ बोलता है उसकी बाते उतनी ही अच्छी होती है। वही जितना ज्यादा दूसरों की बाते सुनी जाए उतना ज्यादा ही ज्ञान बढ़ता है। एक इंसान के पास इतना समय नहीं होता है कि वह हर एक काम को करके खुद जान सके। ऐसे में कम बोलने वाले लोग दूसरों की बात सुनकर इतना कुछ ज्ञान ले लेते है जितना ज्यादा बोलने वाले कभी नहीं ले सकते है।

कम बोलने वाले व्यक्ति की बात दूसरे ध्यान से सुनते है

कोई भी व्यक्ति हो जो कम बोलता है, तो जब भी वह कुछ बोलता है तो उसकी बात दूसरे बहुत ध्यान के साथ सुनते है। ऐसा इसलिए क्योंकि कम बोलने वाला सबसे पहले सबकी बाते सुनता है फिर समझाता है उसके बाद जो बोलता है उस बात में ज्ञान साफ नजर आता है। वही कम बोलने वाला किसी का समय ख़राब नहीं करता है और जरूरत होने पर ही वह बोलता है। ऐसे वह बिल्कुल शांत रहता है। इसी कारण कम बोलने वालो की बाते दूसरे पूरी ध्यान के साथ सुनते है।

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कम बोलने से शरीर की शक्ति बचती है

कम बोलने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति से ज्यादा शक्ति को महसूस करता है जो ज्यादा बोलता है। यहाँ शाक्ति का मलतब है किसी काम को करना, या फिर कुछ नया सीखना या करना, अपने काम में ज्यादा समय दे पाना, आदि। बोलने में इंसान के शरीर का बहुत ज्यादा मात्रा में शक्ति का खपत होता है। इसका सामान्य सा कारण है, बोलते समय दिमाग, मुँह, आदि एक साथ काम करते है। वही जो भी कम बोलता है वह अपने शरीर का बहुत शक्ति बचा लेता है।

कम बोलने से दिमाग तेज होता है

कभी बोलने में दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल होता है वही कभी बोलने में दिमाग का कम इस्तेमाल होता है। अकसर ऐसा देखने को मिलता है कि जो भी ज्यादा बोलते है वह अपने दिमाग का कम से कम इस्तेमाल करते है। ज्यादा बोलना भी एक आदत होती है। कुछ समय ज्यादा बोलने से यह आदत लग जाती है और फिर ज्यादा बोलने में दिमाग का कम इस्तेमाल होता है।

वही कम बोलने से दिमाग काफी हद तक शांत रहता है, दिमाग वह काम करता है जो उसके लिए जरूरी हो, कुछ नया सिखाता है, दिमाग की शक्ति उस काम में बर्बाद नहीं होती है जो जरूरी न हो । यह सभी ऐसे कारण है जो दिमाग को तेज कर देती है।

अपने जरूरी काम को करने का ज्यादा समय मिलता है

जब भी कोई व्यक्ति अपनी आदत कम बोलने की कर लेता है तो उसके पास अपने काम को करने का बहुत ज्यादा समय होता है। कुछ लोग ऐसे भी होते है जो कहते कि उनके पास काम करने के लिए समय नहीं होता है। ऐसे में उन्हें कम बोलने की आदत बना लेना चाहिए। जिस दिन कम बोलने की आदत हो जाएगी उस दिन से अपने जरूरी काम को करने को इतना समय मिलेगा की काम में बाद फ्री समय मिलेगा।

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अंत में

यहाँ पर हमने कम बोलने के बारे में जाना। हमने यह भी जाना की काम बोलना क्यों जरूरी है और कम बोलने का क्या फायदा होता है। यह सभी जानने के बाद हम यह तय कर सकते है कि हमें कम बोलना चाहिए या फिर नहीं। इसके साथ ही हम यह भी जान सकते है कि काम बोलने का क्या कुछ फायदा है।

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