एक सही निर्णय कैसे लें? how to make right decision in Hindi

आपका निर्णय आपको आबाद या बर्बाद दोनों ही कर सकता है। आप अगर एक सही निर्णय लेते है तो आप आज जहा भी है उससे काफी ऊपर तक जा सकते है।

वही अगर आप एक गलत निर्णय लेते है तो आप आज जहा भी है। उससे नीचे आ सकते है। यह बिलकुल सत्य है।

जब हम कोई निर्णय या फैसला लेते है तो हमें हमारा निर्णय बिलकुल ही सही लगता है। हमें लगता है कि हमारा यह फैसला बिलकुल ही सही है।

हमें इस फैसला से कोई भी नुकसान हो ही नहीं सकता है। पर ऐसा बहुत कम समय ही होता है जब हमारा कोई निर्णय सही साबित होता है।

अधिकतर समय हमारे निर्णय का अंत नुकसान दायक ही होता है। अब इसका कारण होता है कि हम निर्णय लेते समय कुछ चीजों का ध्यान नहीं रखते है।

जो की बहुत ज्यादा जरूरी होता है। वही बहुत से ऐसे लोग भी होते है जिनको कोई फैसला लेने में बहुत ज्यादा दिक्क्त होती है।

वह कोई फैसला ही नहीं ले पाते है। चलिए इस पोस्ट में हम जानते है कि कोई फैसला कैसे ले? इसके साथ ही कोई सही निर्णय कैसे ले (how to make right decision in Hindi) ?

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अपने दुश्मन के बारे में सोचें

जब कभी भी आप कोई बड़ा निर्णय ले रहे हो तो आप अपने दुश्मन के बारे में सोचे। आपके जिस निर्णय पर आपका दुश्मन खुश होगा। वह निर्णय न ले।

वही आपके जिस निर्णय पर आपका दुश्मन दुखी होगा। वह निर्णय आपके लिए सही साबित हो सकता है।

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अगर आपका कोई दुश्मन न हो तो आप बस मान ले। ऐसा करके आप एक अच्छा और सही फैसला ले सकते है।

जैसे अगर आप यह निर्णय लेना चाहते है कि आपको आगे की पढ़ाई करनी चाहिए या फिर नहीं। ऐसे में अगर आप आगे की पढ़ाई नहीं करते है तो आपका दुश्मन आपसे खुश होगा।

वही अगर आप आगे की पढ़ाई करते है। तो आपका दुश्मन दुखी होगा। तो आपको आगे की पढ़ाई करनी चाहिए।

हम आपको यह भी बता दे कि कुछ नया करने के लिए यह न सोचे कि इससे कौन खुश होगा और कौन दुखी। बस सफलता पर ध्यान दे।

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फैसले के नुकसान और फायदे को जाने

यह तरीका आपको छोटी या बड़ी कोई भी फैसला लेने में मदद करेगा। आप जब भी कोई फैसला ले रहे हो तो आप यह जानने कि कोशिश करे कि आपके इस फैसले का क्या नुकसान होगा और क्या फ़ायदा।

अगर आपके फैसले से ज्यादा नुकसान होता है और कम फायदा तो आपको ऐसा फैसला नहीं लेना चाहिए।

वही आपके फैसले से ज्यादा फायदा होते है और कम नुकसान तो फिर आपको यह फैसला ले लेना चाहिए।

जैसे अगर आप एक छात्र है। अब आपको फैसला करना है कि आप रविवार को फिल्म देखेंगे या पढ़ाई करेंगे।

अब अगर आप फिल्म देखते है तो आपको ज्यादा नुकसान हो सकता है तो ऐसे में आपको पढ़ाई करने का फैसला लेना चाहिए।

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पढ़ाई करने का फैसला आपके लिए फायदे मंद होगा।

निर्णय तजुर्बा के अनुसार ले

तजुर्बा आपको मदद कर सकता है एक अच्छा और एक सही फैसला लेने में। आपका तजुर्बा आपको बता सकता है कि आपके लिए कौन सा फैसला सही साबित होगा और कौन सा गलत।

यहाँ पर तजुर्बा का मतलब है पिछले समय के लिए गए फैसले और उनसे सीख। इसके साथ ही आप दूसरे व्यक्ति का तजुर्बा इस्तेमाल कर सकते है।

आप सफल व्यक्ति का तजुर्बा उनकी लिखी गई किताब से ले सकते है। जैसे अगर आपको कोई बिज़नेस शुरू करना है तो आप उस लेखक की कितबा को पढ़ सकते है जिसने कोई बिज़नेस को शुरू क्या है और उसे सफल बनाया है।

इसके अलावा आप पढ़ाई के लिए उन लिखक की किताब को पढ़ सकते है जिस लेखक ने पढ़ाई के दम पर सफलता को हासिल किया है।

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दूसरों की सलाह ले

निर्णय लेते समय दूसरे लोगो की सलाह भी हमें मदद करती है। दूसरों लोगो की जानकारी भी हमसे अलग और ज्यादा हो सकती है।

आप जब अपना निर्णय तय कर ले तो फिर उस पर दूसरों की सलाह ले। हम आपको बता दे कि आप बस दूसरों कि सलाह ले न की उनके फैसले या निर्णय को मानें।

दूसरे की सलाह से अपने निर्णय में बदलाव तो करे ले पर दूसरे के निर्णय को ही न मान ले।

अस्थायी फीलिंग में आकर फैसला न करें

फैसला को फीलिंग के दम पर ही न ले। आपका फीलिंग आपको सही या गलत दोनों ही फैसला दिला सकता है।

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हर एक इंसान का फीलिंग समय के साथ बदलता रहता है। बस कुछ समय के लिए हमारा फीलिंग हमें यह महसूस करता है कि हम कुछ भी कर सकते है।

कुछ समय के बाद ही हमारा फीलिंग हमें ऐसा महसूस करता है कि हम कुछ भी नहीं कर सकते है।

इसका उदाहरण हैं मोटिवेशनल वीडियो। मोटिवेशनल वीडियो को देखकर हमें लगता है कि हम कुछ भी कर सकते है।

पर मोटिवेशनल वीडियो देखने के कुछ समय बाद हम सामान्य हो जाते है। इसलिए आप किसी तरह की अस्थायी फीलिंग में आकर फैसला न करें।

शांत मन से शांति से निर्णय ले

फैसला लेते समय किसी अस्थायी फीलिंग को शामिल तो न ही करें। इसके साथ ही निर्णय लेते समय आप अपने मन को शांत करे।

आप अपने मन को शांत करके और शांत स्थान पर बैठ कर कोई भी निर्णय ले। शांत मन और शांत स्थान पर आप जो भी निर्णय लगे वह आपके लिए अच्छा ही साबित होगा।

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अपनी मंजिल को सोचे

कोई भी फैसला लेते समय आप अपनी मंजिल के बारे में सोच। आप जो भी मंजिल हासिल करना चाहते है।

उसके हिसाब से कोई भी निर्णय ले। आप उस निर्णय को ही ले जो निर्णय आपको मंजिल को हासिल करने में किसी भी तरह से मदद करें।

अब हमें इसका कोई उदाहरण देने की जरूरत नहीं है। आप खुद ही समझ सकते है।

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निर्णय लेने में जल्दी न करें

किसी भी तरह का निर्णय लेने में आप किसी तरह की जल्दबाजी न करें। कोई भी छोटा या बड़ा निर्णय आपके जीवन को कई तरह से प्रभावित कर सकता है।

आप छोटा या बड़ा निर्णय ले रहे हो तो उसके लिए आपको जितना समय चाहिए उतना समय ले।

आप सही फैसला लेना कर अपने जीवन को आसान और सरल बना सकते है। वही जल्दबाजी में लिया गया निर्णय अकसर गलत निर्णय ही साबित हो सकता है।

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अंत में कुछ शब्द

जब भी हमें कोई निर्णय लेना होता है तो हमें समझ में ही नहीं आता है कि हम कैसे निर्णय ले। इसके साथ ही कौन सा निर्णय हमारे लिए फायदे मंद होगा.

इसलिए हमने इस पोस्ट में देखा कि हम कैसे एक सही निर्णय ले सकते है।

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